
ब्यावर। ब्यावर-मगरा क्षेत्र के कोटड़ा गांव स्थित प्रसिद्ध बाबा रामदेव मंदिर कोटड़ा दरबार में भादवा बीज के अवसर पर 13 सितंबर को वार्षिक मेले का आयोजन होगा। वर्षों से चली आ रही मेले की परंपरा के चलते इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मेले को लेकर कोटड़ा सहित आसपास के गांवों में तैयारियां और श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई है। राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा गुजरात व अन्य राज्यों से भी बाबा के भक्त दर्शन के लिए पहुंचेंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल यात्रा कर कोटड़ा दरबार पहुंचेंगे। 12 सितंबर की रात रात्रि जागरण, भजन संध्या से सजेगा दरबार मेले से एक दिन पूर्व 12 सितंबर की रात मंदिर परिसर में रात्रि जागरण एवं स्थानीय भजन संध्या का आयोजन होगा। स्थानीय भजन कलाकार बाबा रामदेव के भजनों की प्रस्तुतियां देंगे। रातभर भजन-कीर्तन और बाबा के जयकारों से कोटड़ा दरबार भक्तिमय रहेगा। इसके बाद 13 सितंबर को भादवा बीज के दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। पैदल यात्रियों की सेवा में जगह-जगह भंडारे मंदिर के पुजारी धनराज महाराज ने बताया कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और पैदल यात्रियों की सेवा के लिए रास्ते में जगह-जगह भंडारे लगाए जाएंगे। भंडारों में यात्रियों के लिए भोजन, चाय-पानी सहित आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था रहेगी। ग्रामीण और श्रद्धालु सेवा कार्यों में जुटेंगे। पुजारी धनराज महाराज ने पैदल यात्रियों से विशेष अपील करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान सड़क पर एक तरफ होकर चलें तथा यातायात व्यवस्था का ध्यान रखें, ताकि भीड़ के बीच किसी प्रकार की दुर्घटना नहीं हो। उन्होंने श्रद्धालुओं से सुरक्षित तरीके से यात्रा करने और प्रशासन एवं आयोजकों की व्यवस्थाओं में सहयोग करने का आग्रह किया। 138 साल से आस्था का केंद्र है कोटड़ा दरबार कोटड़ा दरबार की स्थापना वर्ष 1887 में हुई थी। स्थानीय मान्यता के अनुसार कानूजा से केशवदास महाराज गाय चराने कोटड़ा क्षेत्र में आते थे। पानी के लिए उन्हें राजियावास तालाब तक जाना पड़ता था। एक रात कोटड़ा में रुकने के दौरान बाबा रामदेव ने उन्हें दर्शन देकर यहीं बसने और मंदिर निर्माण करने का आदेश दिया। इसके बाद केशवदास महाराज ने मंदिर निर्माण का कार्य शुरू किया, जो करीब 16 वर्षों तक चला। समय के साथ कोटड़ा दरबार बाबा रामदेव के प्रमुख आस्था स्थलों में शामिल हो गया। भादवा बीज पर लगने वाला वार्षिक मेला अब क्षेत्र की धार्मिक पहचान बन चुका है। मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर बाबा के दर्शन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। ब्यावर जिले में बाबा रामदेव के दो प्रमुख धाम ब्यावर जिले में बाबा रामदेव के दो प्रमुख एवं प्रसिद्ध आस्था स्थल—कोटड़ा और बिराटिया माने जाते हैं। भादवा माह में दोनों ही धामों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ गुजरात सहित अन्य राज्यों से भी भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए इन दोनों धामों तक पहुंच रहे हैं। भादवा माह में बाबा रामदेव के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था चरम पर रहती है। क्षेत्र में मान्यता है कि रामदेवरा की यात्रा पर जाने वाले कई श्रद्धालु कोटड़ा और बिराटिया धाम में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं। पूरे भादवा माह दोनों धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं की आवाजाही से भक्तिमय वातावरण बना रहता है। आस्था, सेवा और भक्ति का संगम बनेगा कोटड़ा मेला 13 सितंबर को लगने वाला कोटड़ा दरबार का मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की वर्षों पुरानी आस्था और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। पैदल यात्रियों की सेवा के लिए ग्रामीणों की ओर से लगाए जाने वाले भंडारे, रातभर होने वाला जागरण और भजन संध्या मेले की विशेष पहचान हैं। भादवा बीज पर बाबा रामदेव के जयकारों से कोटड़ा दरबार और आसपास का क्षेत्र भक्तिमय होने की उम्मीद है।
भादवा की बीज पर कोटडा मंदिर परिसर में उमड़ा जनसैलाब रविवार को 13 सितंबर को कोटड़ा दरबार में भरेगा भव्य मेला, 12 की रात गूंजेगा बाबा का दरबार जवाज़। मगरा क्षेत्र के कोटड़ा गांव स्थित प्रसिद्ध बाबा रामदेव मंदिर कोटड़ा दरबार में भादवा बीज के अवसर पर 13 सितंबर को वार्षिक मेले का आयोजन होगा। वर्षों से चली आ रही मेले की परंपरा के चलते इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मेले को लेकर कोटड़ा सहित आसपास के गांवों में तैयारियां और श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई है। राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा गुजरात व अन्य राज्यों से भी बाबा के भक्त दर्शन के लिए पहुंचेंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल यात्रा कर कोटड़ा दरबार पहुंच रहे। 12 सितंबर की रात रात्रि जागरण, भजन संध्या से सजेगा दरबार मेले से एक दिन पूर्व 12 सितंबर की रात मंदिर परिसर में रात्रि जागरण एवं स्थानीय भजन संध्या का आयोजन होगा। स्थानीय भजन कलाकार बाबा रामदेव के भजनों की प्रस्तुतियां देंगे। रातभर भजन-कीर्तन और बाबा के जयकारों से कोटड़ा दरबार भक्तिमय रहेगा। इसके बाद 13 सितंबर को भादवा बीज के दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। पैदल यात्रियों की सेवा में जगह-जगह भंडारे मंदिर के पुजारी ने बताया कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और पैदल यात्रियों की सेवा के लिए रास्ते में जगह-जगह भंडारे लगाए जाते । भंडारों में यात्रियों के लिए भोजन, चाय-पानी सहित आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था रहेगी। ग्रामीण और श्रद्धालु सेवा कार्यों में जुटेंगे। पैदल यात्रियों से विशेष अपील करते हुए बताया कि यात्रा के दौरान सड़क पर एक तरफ होकर चलें तथा यातायात व्यवस्था का ध्यान रखें, ताकि भीड़ के बीच किसी प्रकार की दुर्घटना नहीं हो। उन्होंने श्रद्धालुओं से सुरक्षित तरीके से यात्रा करने और प्रशासन एवं आयोजकों की व्यवस्थाओं में सहयोग करने का आग्रह किया। 138 साल से आस्था का केंद्र है कोटड़ा दरबार कोटड़ा दरबार की स्थापना वर्ष 1887 में हुई थी। स्थानीय मान्यता के अनुसार कानूजा से केशवदास महाराज गाय चराने कोटड़ा क्षेत्र में आते थे। पानी के लिए उन्हें राजियावास तालाब तक जाना पड़ता था। एक रात कोटड़ा में रुकने के दौरान बाबा रामदेव ने उन्हें दर्शन देकर यहीं बसने और मंदिर निर्माण करने का आदेश दिया। इसके बाद केशवदास महाराज ने मंदिर निर्माण का कार्य शुरू किया, जो करीब 16 वर्षों तक चला। समय के साथ कोटड़ा दरबार बाबा रामदेव के प्रमुख आस्था स्थलों में शामिल हो गया। भादवा में लगने वाला वार्षिक मेला अब क्षेत्र की धार्मिक पहचान बन चुका है। मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर बाबा के दर्शन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। ब्यावर जिले में बाबा रामदेव के दो प्रमुख धाम ब्यावर जिले में बाबा रामदेव के दो प्रमुख एवं प्रसिद्ध आस्था स्थल—कोटड़ा और बिराटिया माने जाते हैं। भादवा माह में दोनों ही धामों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ गुजरात सहित अन्य राज्यों से भी भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए इन दोनों धामों तक पहुंच रहे हैं। भादवा माह में बाबा रामदेव के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था चरम पर रहती है। क्षेत्र में मान्यता है कि रामदेवरा की यात्रा पर जाने वाले कई श्रद्धालु कोटड़ा और बिराटिया धाम में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं। पूरे भादवा माह दोनों धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं की आवाजाही से भक्तिमय वातावरण बना रहता है। आस्था, सेवा और भक्ति का संगम बनेगा कोटड़ा मेला 13 सितंबर को लगने वाला कोटड़ा दरबार का मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की वर्षों पुरानी आस्था और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। पैदल यात्रियों की सेवा के लिए ग्रामीणों की ओर से लगाए जाने वाले भंडारे, रातभर होने वाला जागरण और भजन संध्या मेले की विशेष पहचान हैं। भादवा में बाबा रामदेव के जयकारों से कोटड़ा दरबार और आसपास का क्षेत्र भक्तिमय होने की उम्मीद है।
कोटड़ा स्थित बाबा रामदेव मंदिर में विराजमान बाबा रामदेव की प्रतिमा एवं प्रज्वलित अखंड ज्योति।
कोटड़ा बाबा रामदेव मंदिर एवं स्थानीय ग्रामीणों की ओर से लगाए गए भंडारे में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हुए।
सारोठ चौराहे पर अव्यवस्थाओं का अंबार, हर पल हादसे का खतरा ब्यावर-भीम मार्ग के प्रमुख चौराहे पर यातायात व्यवस्था बदहाल, खराब रेड लाइट और सड़क पर खड़े यात्री वाहनों से बढ़ी परेशानी जवाजा। ब्यावर-भीम मार्ग पर स्थित सारोठ चौराहा क्षेत्र का प्रमुख और व्यस्त चौराहा है, लेकिन यहां बिगड़ी यातायात व्यवस्था के कारण हर पल हादसे का खतरा बना हुआ है। चौराहे से प्रतिदिन हजारों वाहनों की आवाजाही होती है। चारों दिशाओं से आने वाले वाहनों के दबाव के बावजूद यातायात व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। चौराहे के आसपास सर्विस रोड पर स्थायी रूप से वाहन खड़े रहने से यातायात प्रभावित होता है। वहीं भीम-ब्यावर मार्ग पर संचालित यात्री वाहन मुख्य सड़क पर ही रोककर सवारियां भरते हैं। इससे पीछे से आने वाले बाइक सवारों और दूसरी दिशा से आने वाले वाहनों को निकलने में परेशानी होती है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। एक रेड लाइट गायब, दूसरी भी व्यवस्था के भरोसे सारोठ चौराहे पर लगी सोलर रेड लाइट व्यवस्था भी बदहाल है। दो रेड लाइटों में से एक गायब है। यातायात नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से चारों दिशाओं से आने वाले वाहन एक-दूसरे के सामने आ जाते हैं। ऐसे में व्यस्त चौराहे पर कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। तेज रफ्तार डंपर-ट्रेलर से बढ़ा खतरा भीलवाड़ा की ओर से आने वाले डंपर और ट्रेलर तेज रफ्तार से गुजरते हैं। कई बार ओवरलोड भारी वाहनों की आवाजाही भी रहती है। वहीं ब्यावर, भीम, सारोठ और कोटड़ा की ओर से आने वाले दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों का दबाव अलग रहता है। यातायात नियंत्रण के अभाव में वाहन चालकों के साथ पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। भादवा मास में पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी भादवा मास में बाबा रामदेव के दर्शन के लिए पैदल जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई है। भीलवाड़ा की ओर से आने वाले पैदल यात्रियों को सारोठ चौराहा पार करने में परेशानी हो रही है। तेज रफ्तार वाहनों के बीच से पैदल यात्रियों के गुजरने के कारण हादसे का खतरा और बढ़ गया है। दो दिन से पड़ा मृत पशु, दुर्गंध से राहगीर परेशान चौराहे के समीप पिछले दो दिनों से मृत पशु पड़ा हुआ है। इससे आसपास तेज दुर्गंध फैल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बावजूद मृत पशु को हटाने की कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने जिम्मेदार विभागों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल सफाई व्यवस्था कराने की मांग की है। हादसों के बाद भी नहीं जागा प्रशासन ग्रामीणों का कहना है कि सारोठ चौराहे पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, इसके बावजूद यातायात व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। मुख्य सड़क पर खड़े यात्री वाहन, सर्विस रोड पर खड़े स्थायी वाहन, गायब रेड लाइट और तेज रफ्तार भारी वाहनों के कारण चौराहा दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील बना हुआ है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग से सारोठ चौराहे की यातायात व्यवस्था तत्काल दुरुस्त करने, गायब रेड लाइट को पुनः लगाने, मुख्य सड़क पर यात्री वाहनों के ठहराव पर रोक लगाने और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था करने की मांग की है।













